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PARADISE II- AASTHA

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PARADISE II- AASTHA

Post by smenaria on Thu Jun 14, 2012 10:10 am



Second creation of paradise series is a story of same girl who is in Paradise-I. The creation is in hindi. I have used easy language since I instead on feelings. Poem goes flawlessly from starting and will not give readers any second to look around. All paras are linked by previous so there is no break. In final of creation it becomes very serious and you will probably feel it....

आस्था

सामने की छत पर चढ़ आया था, सूरज जगाने वाला,
इस शहर में कोई नही था बांग लगाने वाला,
पर आवाज़ से चिढ़कर उसकी, वो बाहर आया,
कौन था सुबह-सुबह नींद से जगाने वाला?


सामने लड़की थी छोटी सी, शायद दस साल की,
वह ग़रीब थी, पर किस्मत थी ज़िम्मेदार इस हाल की,
घर-घर जाकर कुछ ना कुछ माँग ही लेती थी,
खाने की कम, अधिक आशा थी अपमान की.


बुलाया बेगम को, चिल्लाकर ही उसे देखकर,
फटकार दिया, शान के खिलाफ था, दान भी चुप रहकर,
परेशान था दोनो के रोज के क्रम से,
वापस आया निंद्रासन पर, राज करूँगा जी भरकर.


स्त्री का स्वाभाव ही हैं, करूण और दयावान भी,
प्यार से समझाया उसे और दिया दान भी,
जानती थी ईश्वर हैं जो सब देखता हैं,
एक कलंक ही हैं निसंतानता और अरमान भी.


चार लम्हो की ही होती हैं, नींद की भी ज़िंदगी,
साथ रहता कौन हैं? किसकी हैं बंदगी?
बिन आस्था के कोहराम लगती हैं, घंटी की आवाज़ भी,
बिन मन आरती ले, ऑफीस की लिए तैयार हुआ आज भी.


पहले ही बोल दिया, ऑफीस से जल्दी आना,
घर में पूजा थी और मंदिर में था खाना,
पूरा दिन भूखा रहना था, आज उसके उपवास था,
वो नही मानता था, उसके लिए सब बकवास था.


ऑफीस से लौटा, सोचा अब आराम की बारी हैं,
सामने बीवी थी, बोली मंदिर चलो पूरी तैयारी हैं,
मंदिर में ग़रीब थे, खाना खिलाया जा रहा था,
मनोकामना पूर्ण हो यह विश्वास दिया जा रहा था.


दोनो थक गये, घर आते ही सो गये,
सुबह हल्ला मच गया, सोने के पायल खो गये,
पति तो था ही नास्तिक, नास्तिकता को मौका मिल गया,
और करो पूजा, पूजा से क्या मिल गया?


क्रोध की अग्नि तो थी ही और हवा मिल गयी,
जब देखा बाहर वो लड़की 'माँगने' आ गयी,
क्रोध की सीमा ना थी, सीमा से आगे निकल गया,
पति का क्रोध देखकर, उसकी भी आँखो से आँसू निकल गये.


एक बार उसने भी सोचा, आज यहाँ क्यूँ आई थी,
आस्था सच्ची थी, उसकी आस्था रंग लाई थी,
अच्छा लगने लगा वह, जिसमे दिखती बुराई थी,
जब रोते हुए कहा उसने, "में तो पायल लौटने आई थी"...






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